आई0टी0एस0 के फिजियोथेरेपी विभाग द्वारा वेबिनार का आयोजन किया गया.

आई0टी0एस0 के फिजियोथेरेपी विभाग द्वारा 14 मई, 2020 को एक वेबिनार का आयोजन किया गया। प्रख्यात वक्ता डाॅ0 प्रभात रंजन, द्वारा आनलाईन वेबिनार प्रस्तुत किया गया। डाॅ0 प्रभात रंजन वर्तमान में ऐम्स के नूरोलाॅजी विभाग में फिजियोथेरेपिस्ट के पद पर कार्यरत है।

वेबिनार का विषय रीहबिलटैशन आफ टोटल नी रिप्लेसमेंट सर्जरी था। वेबिनार में आई0टी0एस0 के फिजियोथेरेपी विभाग के सभी विद्यार्थियों एवं अध्यापक तथा अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्रों ने भी आनलाईन भाग लिया। वेबिनार के दौरान डाॅ0 प्रभात ने पार्किसंस रोग के बारे में जानकारी प्रदान की तथा उसके ऊपर विचार विमर्श किया। उन्होंने बताया कि पार्किसंस रोग एक मस्तिष्क का विकार है जो मानव शरीर को हिलने चलने एवं संतुलन और समन्वय को प्रभावित करता है। साथ ही उन्होंने बताया कि पार्किसंस रोग के लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होते है और समय के साथ खराब अवस्था मे हो जाते है तथा जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, लोगो जो चलने और बात करने में कठिनाई हो सकती है। उनमें मानसिक और व्यवहारिक परिवर्तन, नींद की समस्या, अवसाद, स्मृति में कमी और थकान भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि यह एक तीव्र बीमारी है और प्रगति के अनुसार पार्किसंस के चरणों से पीड़ित व्यक्ति के कार्यात्मक पहलू के आधार पर परिभाषित किया गया है। डाॅ0 प्रभात ने बताया कि पार्किसंस रोग वाले लोगों का इलाज दवाओं और मुख्य रूप से केवल नियमित रूप से व्यायाम है, तथा कुछ लोगों को डी0बी0एस0 के द्वारा भी ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि डी0बी0एस0 यानल डिरेक्ट ब्रेन स्टिम्युलेशन गहरे मस्तिष्क में बिजली की तरंगे पैदा करता है इसलिए जो मरीज डी0बी0एस0 से प्रतिकूल प्रभाव नही दिखाते उन्हें इसके लिए उपयुक्त माना गया है। वेबिनार के दौरान वक्ता ने बताया कि डी0बी0एस0 एक शल्य प्रक्रिया है जो शल्य चिकित्सा द्वारा मस्तिष्क के हिस्से मे इलेक्ट्रोड लगाती है और उन्हें छाती में प्रत्यारोपित एक छोटे विद्ययुत उपकरण से जोड़ती है। तथा उपकरण और इलेक्ट्रोड एक तरह से मस्तिष्क को उत्तेजित करते है जो पार्किसंस के कई लक्षणों को रोकने में मदद करता है, जैसे कि कंप-कंपी, हाथ पांव चलने में सुस्ती और अकड़न आदि। उन्होंने एक और आधुनिक प्रणाली का विवरण दिया जिसका नाम आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स (ए0आई0) है। उन्होंने बताया कि किस तरह कम्प्यूटर विज्ञान की इस शाखा आर्टिफिशल इंटेलिजेन्स (ए0आई0) को अनुसंधान के द्वारा पार्किसंस बीमारी के लिए उपयोग किया जा रहा है। वेबिनार के अंत में वक्ता डाॅ0 प्रभात ने सभी विद्यार्थियों के द्वारा पूछें गये सभी प्रश्नों के जवाब दिये।

कोविड-19 के प्रकोप के कारण छात्रों के शिक्षण कार्य का नुकसान न हो इसलिए आई0टी0एस0 – द ऐजूकेशन ग्रुप के चेयरमैन डाॅ0 आर0पी0 चड्ढा तथा वाईस चेयरमैन श्री अर्पित चड्ढा ने छात्रों के लिए इस सफल आनलाईन वेबिनार का आयोजन किया जिसके लिये सभी प्रतिभागियों ने उनकों धन्यवाद दिया।

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