गलगोटियास विश्वविद्यालय में भारत के वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और संभावनाओं पर सेमीनार का हुआ आयोजन

गलगोटियास विश्वविद्यालय में भारत के वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं और संभावनाओं पर गरिमापूर्ण बहुविषयक परिप्रेक्ष्य के साथ बुढ़ापा इस विषय पर दो दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया |

यह दो दिवसीय सेमीनार 20 से 21 मार्च-2024 तक गलगोटियास विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लिबरल एजुकेशन- शांति शिक्षा और अनुसंधान के उत्कृष्टता केंद्र में स्कूल ऑफ लिबरल एजुकेशन की डीन डा० अनुराधा पाराशर के संरक्षण में आयोजित किया गया है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डा० के० मल्लिकार्जुन बाबू, प्रो० वॉइस चॉसलर डा० अवधेश कुमार, पूर्व वाइस चांसलर एवम् चॉसलर सलाहकार डा० रेनु लूथरा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डा० नितिन गौड़ और डा० अनुराधा पाराशर ने सरस्वती वन्दना के साथ दीप प्रज्वलन करके किया।

यह कार्यक्रम भारत के उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के गलगोटियास विश्वविद्यालय संपन्न हुआ। इसे भारतीय स्कूल रक्षा संस्थान (आईएनएसडी) के परिपालन में, भारत सरकार के विधि और सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया।
गलगोटियास विश्वविद्यालय के वॉइस चॉसलर डा० के० मल्लिकार्जुन बाबू ने कहा कि हम आप सभी को यह आश्वासन देते हैं और विश्वास दिलाते हैं कि यह दो दिवसीय सेमिनार विचारों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभव के आदान-प्रदान के लिए एक विशेष मंच के रूप में कार्य करेगा, जिससे भारत में वरिष्ठ नागरिकों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव अवश्य पड़ेगा।

गलगोटियास विश्वविद्यालय के चॉसलर सुनील गलगोटिया ने कहा कि जिस परिवार, जिस समाज और जिस राष्ट्र में देश की युवा पीढ़ी अपने माता-पिता, अपने गुरूजनों और अपने से बड़ों का सम्मान करती है। वो राष्ट्र सदैव उन्नति की ही ओर अग्रसर होगा। आज इस अवसर पर मैं देश के युवाओं को विशेष रूप से विद्यार्थियों को मैं अपने संदेश में कहना चाहता हूँ कि वो सदैव अपनी महान संस्कृति का अवलंबन करते हुए अपने जीवन में आगे बढते रहें।

गलगोटियास विश्वविद्यालय के सीईओ डा० ध्रुव गलगोटियास ने कहा कि हमें सदैव अपने बडों का सम्मान करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने बडों का सम्मान करता है उनका सदैव ध्यान रखता है। जो सदैव अपने से बडों के प्रति विनम्र रहता है उसके जीवन में सदैव उन्नति के रास्ते खुलते चले जाते है। और उसकी आयु, विद्या, यश और बल ये चारों वस्तुऐं जीवन भर बढती ही रहती हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम सदैव जीवन भर अपने बड़े-बुजुर्गों की सेवा में हमेशा-हमेशा तत्पर रहें।

गलगोटियास विश्वविद्यालय की डायरेक्टर ऑपरेशन सुश्री आराधना गलगोटिया ने आये हुए सभी वृद्धजनों का सम्मान करते हुए कहा कि आज आपके हमारे इस गलगोटियास विश्वविद्यालय के प्रांगण में आने से हमें और हमारे विद्यार्थियों को आपका बहुत-बहुत आशीर्वाद मिला है। और आपन अपने जीवन के जो अनुभव हम सब के साथ साँझा किये हैं। वो हमारे जीवन में आगे काम आने वाली अमूल्य निधि है। आपके उन विचारों को हम सदैव संजोकर रखेंगे।

विश्वविद्यालय की पूर्व वाइस चांसलर और चॉसलर सलाहकार डा० रेनु लूथरा ने कहा कि बिना अपने बडों के हम सब की ज़िन्दगी अधूरी है। परिवार पर घर पर जब भी कोई बडा संकट आ जाता है तब हम सबसे पहले अपने बडे के पास ही जाकर उनके जीवन के अनमोल अनुभव की सलाह लेते हैं और हम हमारी समस्या का पक्का समाधान मिल जाता है। यही है उनका हमारे ऊपर आशीर्वाद।

विश्वविद्यालय के प्रो० वॉइस चॉसलर डा० अवधेश कुमार ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप अपने जीवन में चाहे कितनी भी सफलता प्राप्त कर लें चहें आप कितने भी बड़े व्यक्ति बन जायें परन्तु जिनकी वजह से आपको सफलता मिली है। जिनकी वजह से आज आप इतने ऊँचे पायेदान पर पहुँचे हैं। उनको अपने माता पिता और गुरू को कभी नहीं भूलना। बस मेरा आज का आपको यही संदेश है।

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