जेपी हॉस्पिटल में ‘ड्यूल लोब लिवर ट्रांसप ्लांट सर्जरी’ द्वारा बचाई गई मंगोलियन मरीज क ी जान

GREATER NOIDA TENNEWS REPORTER LOKESH GOSWAMI

‘ड्यूल लोब लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी’ में एक मरीज को लगाया जाता है दो लोगों का लिवर

  • मरीज का 130 कि.ग्रा. वजन होने के कारण थी दो लोगों के लिवर की जरूरत, 16 घंटे से अधिक चला ऑपरेशन

नोएडाः दिल्ली-एन.सी.आर. में अग्रणी एवं उत्तर भारत में प्रमुख स्थान रखने वाले, नोएडा सेक्टर 128 स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थान जेपी हॉस्पिटल के लिवर प्रत्यारोपण विभाग के चिकित्सकों ने एक बार फिर न सिर्फ अपने विश्वविख्यात हुनर का परिचय दिया बल्कि बहुत ही अनोखा ऑपरेशन कर एक मरीज का जीवन बचाने में सफलता पाई। मरीज मंगोलिया का रहने वाला है जिसका जेपी हॉस्पिटल में लिवर प्रत्यारोपण किया गया। अनोखी बात यह है कि रोगी को दो लोगों का लिवर प्रत्यारोपित किया गया। इस ऑपरेशन में चिकित्सकों को करीब 16 घंटे से अधिक समय तक सर्जरी करनी पड़ी। यह सफलता जेपी हॉस्पिटल के लिवर प्रत्यारोपण विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिदीप चौधरी एवं उनकी टीम को मिली।जेपी हॉस्पिटल में लिवर प्रत्यारोपण विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिदीप चौधरी ने इस बारे में विस्तार से बताया, “38 वर्षीय मरीज पुरेवसुरेन दोरजी का लिवर जून 2016 में खराब हो गया था। इसके बाद स्थानीय चिकित्सकों ने उसे अक्टूबर 2016 में लिवर प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी थी। आमतौर पर जब भी किसी मरीज का लिवर प्रत्यारोपण किया जाता है तो एक प्राप्तकर्ता को एक ही दाता द्वारा लिवर दिया जाता है, लेकिन यह मामला थोड़ा अलग था। जब मरीज लिवर प्रत्यारोपण कराने जेपी हॉस्पिटल आया तो जांच के बाद पता चला कि उसका वजन बहुत बढ़ा हुआ था और बढ़े हुए वजन के कारण उसके शरीर के लिवर का आकार भी सामान्य से अधिक बड़ा था। इसलिए उसे दो व्यक्तियों के लिवर की जरूरत थी। इसलिए ड्यूल लोब सर्जरी द्वारा मरीज की जान बचाई गई।”सीनियर कंसल्टेंट डॉ. चौधरी ने आगे कहा, “वास्तव में ‘ड्यूल लोब सर्जरी’ चिकित्सकों के लिए एक चुनौती होती है क्योंकि इसमें एक साथ तीन ऑपरेशन किया जाता है। इसलिए इस सर्जरी को सफल बनाना बहुत ही चुनौती का काम था, लेकिन हमारी अनुभवी टीम ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। पुरेवसुरेन दोरजी का जीवन बचाने के लिए 16 घंटे से अधिक का समय लगा। मरीज को उसके दो भाइयों (एक भाई की उम्र 35 वर्ष एवं दूसरे भाई की उम्र 31 वर्ष) ने लिवर दान किया।ऑपरेशन की सफलता एवं नया जीवन पाने के बाद उत्साहित मरीज पुरेवसुरेन दोरजी ने अपनी बात कही, “लिवर की खराबी के कारण मेरा जीवन परेशानियों से भर गया था। जब मैंने डॉक्टर से सम्पर्क किया तो मुझे लिवर प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी गई। जब मैं जेपी हॉस्पिटल आया तो डॉ. अभिदीप चौधरी ने बताया कि बढ़े हुए वजन के कारण मुझे दो व्यक्तियों के लिवर की जरूरत होगी। डॉक्टर की बात सुनकर मैं बहुत ही चिंतित हो गया था क्योंकि इससे पहले मैंने कभी ऐसी सर्जरी के बारे में नहीं सुना था। डॉ. चौधरी ने मुझे इस सर्जरी, सर्जरी के बाद लिवर के कार्य करने की प्रकृति आदि के बारे में विस्तार से बताया। इसके बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा और मैंने यह सर्जरी कराने का निर्णय लिया। आज मैं सामान्य जीवन जी रहा हूं।”गौरतलब है कि जेपी हॉस्पिटल के लिवर प्रत्यारोपण विभाग के चिकित्सकों द्वारा पूर्व में भी ऐसी ही जटिल सर्जरी कर कई मरीजों को नया जीवन प्रदान किया गया है। इस विभाग द्वारा केवल साल 2016 में ही 60 से अधिक मरीजों का लिवर प्रत्यारोपण किया गया है जो अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही इस विभाग के चिकित्सकों द्वारा चिकित्सकीय जटिलताओं से युक्त लिवर प्रत्यारोपण, ए.बी.ओ. इंकंपैटिबल लिवर प्रत्यारोपण आदि कर कई लोगों के जीवन को बचाया है और अब ‘ड्यूल लोब लिवर प्रत्यारोपण’ कर जेपी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपने चिकित्सकीय हुनर को दुनिया के सामने साबित कर दिया।

जेपी हॉस्पिटल के बारे में-

नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल 18 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। हॉस्पिटल की योजना और डिज़ाइन 1200 बेड्स से युक्त टर्शरी केयर स्पेशलिटीसुविधा के रूप में तैयार की गई है। प्रथम चरण में 525 बेड्स के साथ इसका सफल संचालन किया जा रहा है।जेपी हॉस्पिटल अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं, नैदानिक सेवाओं एवं आधुनिक तकनीकों से युक्त सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल है, जो आम जनताकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करता है। हॉस्पिटल की योजना, डिज़ाइन एवं निर्माण कार्य इसे भारत के कुछ हीगोल्ड लीड प्रमाणित हॉस्पिटल इमारतों में शामिल करते हैं।

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