“और वही विदा गई गया जिसे चिंता थी कन्या दान की’, किसान आत्महत्या पर कवि का मार्मिक गीत

किसानों की व्यथा पर आज इंडिया एक्सपो मार्ट में वरिष्ठ कवि ने जब इस मार्मिक कविता का पाठ किया तो पूरा सदन तालियों से गूंज उठा । कवि की कविता का मूल था, "और वही विदा गई गया जिसे चिंता थी कन्या दान की, माला जैसे बिखरीं किस्मत थी वो किसान की",

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