“तूफानों से आंख मिलाओं, सैलाबों पर वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर कर दरिया पार करो” राहत इंदौरी @BIMTECHNoida

राहत इंदौरी ने अपने काव्य पाठ की शुरुआत अपनी बेहद प्रसिद्ध नज़्म से की । उन्होंने बोला, "किसने दस्तक दी ये दिल पर कौन है,
आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है ?
राज जो कुछ हो, इशारों में बता भी देना,
हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना । "

उन्होंने फिर सुनाया, "तूफानों से आंख मिलाओं, सैलाबों पर वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर कर दरिया पार करो"
फूलों की दुकानें खोलो, खुसबू का व्यापार करो,
इश्क़ अगर खता है तो खता बार बार करो !"

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