भारतीय जेलो में बंद सभी कैदियों का अधिकार दिलाने के लिए गलगोटिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने जनहित याचिका की दायर

गलगोटिया विश्वविद्यालय में कानून की पढाई कर रहे तीन छात्र प्रवीण कुमार चौधरी , अतुल कुमार दूबे, और प्रेरणा सिंह ने भारतीय जेलो में बंद सभी कैदियों के वोट करने के अधिकार के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पी0आई0एल0) फाईल की हैं। जिसके द्वारा माननीय न्यायालय से मांग करते हुए कहा है कि देश की सभी जेलो में बंद कैदियों और पुलिस की कस्टडी में मुल्जिमों को चुनाव में मत करने का अधिकार मिले। यह याचिका भारतीय संविधान के आर्टिकल (226) के तहत हमारे संविधान में निहित प्रावधानो आधार पर दायर की गई है। जो भारतीय नागरिकों को राजनितिक न्याय और समानता को सुनिश्चित करते हैं।

 

और साथ ही साथ 14, 19 (1) (ए) और 21 के द्वारा मौलिक अधिकार प्रदान करते हैं। इस रिट के आधार पर दिल्ली हाई काॅर्ट ने जेल में बंद कैदियों को मताधिकार की मांग की याचिका पर केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग, और जेल प्रशासन से जवाब मांगा है। याचिका में छात्रों ने कहा है कि कैदियों के वोट के अधिकार पर अंधा प्रतिबंध संविधान में निहित आत्मा और समानता के मूल सिद्धांत का भी उल्लंघन हैं। याचिका में जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 62(5) की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। जो कैदियों को मतदान के अधिकार से वंचित करती है। छात्रों का कहना है कि अगर जेल से कैदी चुनाव लड सकते है।

 

तो मताधिकार का प्रयोग क्यों नही कर सकते। छात्रों ने बताया कि यह अधिकार आस्ट्रेलिया, कनाडा, पाकिस्तान, न्यूजिलैंड, और साउथ अफ्रीका जैसे देशो के कैदियों को प्राप्त है। तो विश्व के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश भारत में क्यों नही। अगर भारत के कैदियों को यह अधिकार मिलता है तो इससे चुनाव में वोट प्रतिशत तो बढेगा ही साथ ही साथ पार्टी लीडर जेलो में जाकर कैदियों की परेशानीयों और असुविधाओं को भी देख सकेंगें। जिससे देश के लोकतंत्र और राजनितिक पार्टीयों को भी फायदा होगा।

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