गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के भारतीय दृष्टिकोण विषय पर 2 दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन

गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के भारतीय दृष्टिकोण विषय पर 2 दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन
Greater Noida (02/02/19) : ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय अध्धयन विभाग स्कूल ऑफ ह्यूमिनुटीज एंड सोशल सांइस स्कूल द्वारा अंतरराष्ट्रीय संबंधों के भारतीय दृष्टिकोण विषय पर दिनांक 1 ओर 2 फरवरी को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस सेमिनार के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आम्बेकर थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो भगवती प्रकाश शर्मा ने की। मुख्य अतिथि सुनील आम्बेकर जी ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय प्राचीन परम्परा के आधार पर समझने व पढ़ने पर बल दिया। आज अंतरराष्ट्रीय अध्धयन पर पश्चिमी देशों का अकादमिक प्रभुत्व है क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों को पढ़ाने के लिये एक विषय के रूप में अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने अपने पाशचात मूल्यों को पिरोया तथा विश्व पर अपने दृष्टिकोण तथा सभ्यता को लागू किया इस प्रभाव से भारत भी प्रभावित है। अतः अंतरराष्ट्रीय अध्धयन को भारतीय द्रष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है।
भारत मे आधुनिक अंतरराष्ट्रीय विचार के शुरुआती प्रभुत्व व्यक्तियों में एक बंगाली राजनीतिक सिद्धांतकार विनय कुमार सरकार ने “अमेरिकन पोलिटिकल साइंस रिव्यु” जनरल में हिन्दू थ्योरी ऑफ़ इंटरनेशनल रिलेशन्स” में कौटिल्य ओर कमेदक के नीतिशार  की शिक्षाओ को मंडल के सिंद्धान्तों के साथ मिश्रित किया गया था।
इसे उन्होंने हिन्दू आइडिया ऑफ बेलेंस ऑफ पावर बताया वैदिक ग्रंथो को पश्चमी अंतरराष्ट्रीय विचारों के संबंध में देखने की आवश्यकता है। राय ने पश्चिमी ज्ञान को एक गंभीर चुनोती दी। लेकिन  विगत 60 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय अध्ययन पर कोई भारतीय विद्वान अधिक सकारात्मक योगदान नही दे पाए। अतः आज अंतरराष्ट्रीय अध्धयन को भारतीय दृष्टि कोण से समझने की आवश्यकता है। तभी हम लोग पाशचात दृष्टि कोण से छुटकारा पा सकेंगे। अपने राष्ट्रीय भाषण में कुलपति प्रो भगवती प्रकाश शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्राचीन भारतीय ज्ञान/पम्परा के माध्यम से नए सिंद्धान्तों का प्रतिपादन करने पर बल दिया।
अधिष्ठाता डॉ नीति राणा ने सेमिनार में आये सभी अथितियों एवं मुख्य अतिथि  का स्वागत किया तथा भारतीय परम्परा को पाठ्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा समाहित करने पर बल दिया। जवाहर लाल नेहरु विश्व विद्यालय के प्रो0 अश्विनी महापात्रा ने  की नोट स्पीकर के रूप में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन को वैदिक ज्ञान तथा कौटिल्य दुवारा प्रतिपादित-कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय पाठ्यक्रमो में लागू करने पर बल दिया।
सेमिनार के दूसरे दिन का आरम्भ “आर्गनाइजर” थे संपादक प्रफुल्ल केतकर के उदबोधन से हुई। प्रफुल्ल केतकर ने भारतीय सभ्यता को केंद्र में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों को समझने पर बल दिया।
सेमिनार के अगले सत्र की अध्यक्षता डॉ0 उत्तम कुमार सिन्हा ने शुरुआत की इसमें दक्षिण एशिया तथा भारतीय दृष्टिकोण पर प्रकाश पर प्रकाश डाला दो दिवसीय सेमिनार का समापन डॉ0 सच्चीदानंद जोशी, सदस्य सचिव, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के समापन भाषण के साथ हुई।

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