मैं तेरी माँ की उम्र की हूँ – ऐसे दुषकरम अपर ाधी की सजा भी मृत्यु दंड की होनी चाहिए

दैनिक जागरण समाचार पत्र के दिनांक 5/5/18 को प्रकाशित अंक में "कासना कोतवाली क्षेत्र" में घटित लूट व दुषकरम की घटना की जितनी निंदा की जाए थोड़ा है । एक माॅ समान 70 वर्षीय वरिष्ठ महिला के कहने के बावजूद भी दरिदो को लाज नहीं आई।मैने इस समाचार को पढ़ने के तुरंत बाद इस क्षेत्र की एस पी, मेडम सुनीति जी से वार्ता करना चाहा पर वार्ता नहीं हो पायी । आए दिन इस प्रकार की दुखद धटनाए हो रही है, पहले थानों मे लिखी नहीं जाती थी परंतु अब लिखी भी जा रही है और पुलिस भी मुसतेदी से धर पकड़ भी कर रही है । कोर्ट में काफी समय लगने के कारण सजा बेअसर सी दिखने लगी है । 2012 में निर्भया के साथ हुए जघनय अपराध के खिलाफ पूरा देश लामबंद हुआ फिर भी – 6 साल बाद भी अपराधी फांसी के फंदे पर नहीं लटगाए जा सके हैं ।
वर्तमान सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से समयसीमा निरधारित कर न्याय दिलाने की षहल की है।अध्यादेश की वैधरता 6 माह की है ।क्या सरकार, लोक सभा व राज्य सभा में जैसी स्थिति चली थी ऐसी स्थिति में इसे नियमित कानून का दर्जा दिला पाएगी ?
नए कानून में उम्र के हिसाब से सजा का प्राविधान है। ऐसी दशा में जो 70 वर्षीय वरिष्ठ महिला आहत हो उस नीच बलात्कारी को मां का वासता दे रही है और फिर भी वह नहीं मानता ऐसे अपराधी की सजा भी मृत्यु दंड की होनी चाहिए । मै यह माँग वरिष्ठ नागरिक समाज (अखिल भारतीय पंजीकृत संस्था) के पूर्व महासचिव के रूप में करता हूँ ।
हरिश गुप्ता (9456084163)

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