Daily Archive: May 11, 2017

जनपद के सभी सम्बन्धित अधिकारी बाढ़ एवं सू खा की कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत करें: बीएन सि ंह।

गौतमबुद्धनगर 11 मई, 2017 –

जिलाधिकारी बीएन सिंह ने बाढ़ एवं सूखा से सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा बाढ़ एवं सूखा की स्थिति आने पर उनके विभाग के द्वारा क्या क्या कार्यवाही की जानी है उसके सम्बन्ध में तत्काल प्रभाव से कार्यवाही करते हुये अपने अपने विभाग की कार्ययोजना बनाकर तुरन्त जिला प्रशासन को उपलब्ध करायी जाये।
डीएम बीएन सिंह कलेक्टेªट के सभागार में इस सम्बन्ध में अधिकारियों के साथ बैठक करते हुये जनपद की भौगोलिक स्थिति के आधार पर बाढ एवं सूखा के बारे में विभागीय समीक्षा करते हुये अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दे रहे थे। उन्होनें कहा कि सभी अधिकारियों के द्वारा इस सम्बन्ध में अपने स्तर पर व्यापक कार्ययोजना बनाकर उसे अन्तिम रूप दिया जाये और उनके द्वारा इस कार्य में जो ड्यूटी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लगायी जानी है उन्हें भी तत्काल प्रभाव से लगा दिया जाये।
उन्होनें समीक्षा के दौरान पाया कि बाढ से सम्बन्धित सिचॉई विभाग के द्वारा 2 बाढ चौकियों की स्थापना करनी है अतः उनके द्वारा इनकी स्थापना करते हुये वहॉ पर 15 जून से निर्धारित सभी स्टाफ की ड्यूटी लगाते हुये उनके मोवाईल नम्बर भी प्रभावित क्षेत्र के ग्रामों में उपलब्ध करा दिये जाये और ग्रामीणों को इस सम्बन्ध में जागरूक भी कर दिया जाये। उनके द्वारा बाढ से सम्बन्धित 10 स्थानों पर बंदों की आंशिक मरम्मत का जो कार्य प्रस्तावित है वह आगामी 15 जून तक प्रत्येक दशा में पूरा करा दिया जाये।
डीएम ने कहा कि विगत वर्षो की भॉति इस वर्ष भी 17 बाढ़ चौकियों की स्थापना की जानी है इसकी सभी तैयारियॉ पूर्ण करते हुये सम्बन्धित स्टाफ की ड्यूटी लगा दी जाये और उनके नम्बर भी क्षेत्रीय लोगों को उपलब्ध करा दिये जाये। उन्होनें इस बात पर विशेष बल दिया कि वर्षा के मौसम में सभी बाढ चौकियॉ पूर्णतः सक्रिय रहे और यदि बाढ़ की कोई भी सूचना प्राप्त होने पर उनके द्वारा तत्काल प्रभावी कार्यवाही अमल में लायी जाये। डीएम ने राजस्व, सिचॉई, चिकित्सा, पशु चिकित्सा, आपूर्ति, जल निगम, वन तथा अन्य सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये कि उनके द्वारा बाढ एवं सूखा से निपटने के लिये अपनी सभी तैयारियॉ पूर्व से ही कर ली जाये साथ ही 3 दिनों के भीतर अपनी कार्ययोजना बनाकर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को उपलब्ध करा दी जाये।
बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त घनश्याम सिंह, सभी तहसीलदार गण, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी विजय बहादुर सिंह, सिचॉई विभाग के अधिशासी अभियन्ता, जल निगम के अधिकारी तथा अन्य अधिकारियों द्वारा भाग लिया गया-राकेश चौहान सूचनाधिकारी।

PROTEST BY HALF NAKED LAWYER AT GREATER NOIDA AUTHORITY

न्यूज़ फ्लैश
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के मुख्य गेट पर अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शन प्रदर्शन करने पहुंचा एक प्राइवेट कंपनी का सीनियर लीगल मैनेजर, 2 साल से अथॉरिटी के चक्कर लगा रहा है पीड़ित, 47 लाख रुपय देने के बाद भी आज तक नहीं मिला है फ्लैट का पजेशन, लगभग 1 घंटे हाई वोल्टेज ड्रामा चलने के बाद अथॉरिटी के अधिकारियों के हाथ पांव फूले,प्रदर्शन कर रहे युवक के मान-मनौव्वल में जुटे अथॉरिटी अधिकारी,पीड़ित ने अथॉरिटी के अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल।

Dariyaav Singh Gurjar – A Great Freedom Fighter of 1857 Revolt

Dariyaav Singh Gurjar – A Great Freedom Fighter of 1857 Revolt

दरियाव सिंह गुर्जर बहुत ही वीर,साहसी थे इनके डर के चलते अंग्रेजी सेना भी इलाके में नही आती थी। ये नागर (नांगडी) गौत्र के वीर गुर्जर थे।इनका जन्म दनकौर (उ.प्र) के निकट ग्राम जुनैदपुर मे हुआ था। जो अब वर्तमान मे ग्रेटर नौएडा क्षेत्र मे आता है।
और 1857 के महानायको मे से एक थे। बुलन्दशहर के काले आम का खूनी दांश्ता को भला कौन नही जानता। जिसपर सैकडो वीर गुर्जरो को लटकाया गया। उस खुनी संग्राम मे एक नाम दरियाव सिंह गुर्जर का भी था । इनके नेत्रत्व मे आसपास के ग्रामीणो गुर्जरो ने अंग्रेजी सैना से लगातार कई दिन युध्द किए और अंग्रेजी हुकुमत से अपना लोहा मनवाया। इनके गाँव जुनैदपुर के ठीक सामने कई अंग्रेजो की कोठीयाँ और किले बने थे जो आज भी मौजूद है।लेकिन दरियाव सिंह गुर्जर के खौफ से अंग्रेजो की इलाके मे घुसने की भी हिम्मत नही होती थी । दरियाव सिंह की 1857 के स्वतंत्रा संग्राम मे महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।10 मई को मेरठ से 1857 की जन-क्रान्ति की शुरूआत कोतवाल धनसिंह गुर्जर द्वारा हो चुकी थी । दरियाव सिंह और उनके नेत्रत्व मे ग्रामीण क्रांतिकारियों ने 1857 के गदर मे अंग्रेजी हुकुमत के छक्के छुड़ा दिए थे।तत्कालीन राष्टृीय भावना से ओतप्रोत दरियाव सिंह गुर्जर ने आसपास के ग्रामीणो को प्रेरित किया। दूसरी तरफ दादरी रिसायत के राजा उमरावसिंह गुर्जर ने भी आसपास के सभी गाँव के ग्रामीणो को एकत्र करलिया था और फिर गुर्जरो ने 12 मई 1857 को सिकन्द्राबाद तहसील पर धावा बोल दिया। वहाँ के हथ्यार और खजानो को अपने अधिकार मे कर लिया। इसकी सूचना मिलते ही बुलन्दशहर से सिटी मजिस्ट्रेट सैनिक बल सिक्नद्राबाद पहुँच गया। और दरियाव सिंह और उनकी क्रान्तिकारी सैना ने अंग्रेजो की काफी जनहानी की। लेकिन दरियाव सिंह गुर्जर समेत पांच वीर गुर्जर पकडे गये। उनको बंदी बना लिया गया और 14 मई 1857 को बुलंदशहर में काला आम पर फांसी दी गई। लेकिन ये खुनी जंग यहा नही रूकी। उसके बाद भी 7 दिन तक क्रान्तिकारी सैना ने उमराव सिंह गुर्जर के नेत्रत्व अंग्रेज सैना से ट्क्कर लेती रही । अंत मे 19 मई को सश्स्त्र सैना के सामने क्रान्तिकारी वीरो को हथियार डालने पडे 46 लोगो को बंदी बनाया गया । उमरावसिंह गुर्जर बच निकले । इस क्रान्तिकारी सैना मे गुर्जर समुदाय की मुख्य भूमिका होने के कारण उन्हे ब्रिटिश सत्ता का कोप भोजन होना पडा।उमरावसिंह गुर्जर अपने दल के साथ 21 मई को बुलन्दशहर पहुचे एवं जिला कारागार पर घावा बोलकर अपने सभी राजबंदियो को छुडा लिया । बुलन्दशहर से अंग्रेजी शासन समाप्त होने के बिंदु पर था लेकिन बाहर से सैना की मदद आ जाने से यह संभव नही हो सका
हिंडन नदी के तट पर 30 व 31 मई को क्रान्तिकारी सैना और अंग्रेजी सैना के बीच एक ऐतिहासिक भीषण युद्ध हुआ। जिसकी कमान क्रान्तिनायक धनसिहँ गुर्जर, राव उमराव सिहँ गुर्जर, राव रोशन सिहँ गुर्जर व दरियाव सिंह गुर्जर के हाथ मे थी। इस युद्ध में अंग्रेजो को मुहँ की खानी पडी थी।
26 सितम्बर, 1857 को कासना-सुरजपुर के बीच उमरावसिंह की अंग्रेजी सैना से भारी टक्कर हुई । लेकिन दिल्ली के पतन और बाकी राज्यो के क्रान्ति मे हिस्सा ने लेने के कारण क्रान्तिकारी सैना का उत्साह भंग हो चुका था । भारी जन हानी के बाद क्रान्तिकारी सैना ने पराजय श्वीकार करली । उमरावसिंह गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया गया । इस जनक्रान्ति के विफल हो जाने पर बुलंदशहर के काले आम पर
80 वीर गुर्जर और उनकी नेत्र्तव मे हजारो क्रान्तिकारी शहीद हुए इनमे किसी को हाथी के पैर से कुचलवाया तो किसी को फांसी पर लटकाया । राजा राव उमराव सिहँ गुर्जर, राव रोशन सिहँ गुर्जर, राव बिशन सिहँ गुर्जर और सैकडो वीरो को भी बुलन्दशहर मे कालेआम के चौहराहे पर फाँसी पर लटका दिया गया ।

वर्तमान मे दरियाव सिंह गुर्जर के नाम से चौक बनाया गया है। और उनके नाम रोड का नामकरण किया गया है। (दरियाव सिंह गुर्जर मार्ग) और हर साल इनके नाम से बडे स्तर पर कुश्ती और मेले का आयोजन होता है। और उस वक्त जगह जगह इनके पोस्टर छपे हुए आप देख सकते है। ये बहुत ही अच्छा कार्य हुआ है
इन वीर शहीदो के बारे मे कुछ इतिहासकारो को छोडकर ,किसी ने लिखने का कष्ट नही किया । यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि इन शहीद क्रान्तिकारीयो को इनका सम्मान दिलाने के लिए किसी ने भी कदम नही बढाया। बल्की कंही नाम दबाया गया तो कंही इनके नाम की जगह सिर्फ जनता बोलकर दो शब्द मे ही किस्सा खत्म करदिया।
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